पिछले भाग में आपने पढ़ा कि ट्रेन में मिली काली सलोनी लड़की की तरफ आकर्षित होकर मैंने उसके साथ प्रेम संबंधों की बात छेड़ दी. मैं अपने मकसद में कामयाब भी हो गया और वह आकर मेरे पहलू में बैठ गई. फिर मैंने उसके काले हुस्न की तारीफ की और इस वजह से मैं उसका भरोसा जीतने में कामयाब हो गया.
अब आगे:
अब आगे:
सलोनी- सच कहूं तो आपकी मुस्कराहट पर पहली नज़र में ही आप मुझे भी अच्छे लगे थे, शायद इसीलिए बिना कुछ सोचे समझे मैं आपके साथ चली आई.
पहली बार सलोनी ने अपने दिल के राज़ खोले. जैसे पहली नज़र में वो मुझे अच्छी लगी वैसा ही उसको ही फील हुआ. सलोनी अभी भी मुझसे चिपक कर बैठी थी. मेरा हाथ अभी भी उसकी कमर में था, न सलोनी ने कोई ऐतराज़ किया और न मैंने हाथ हटाया. बात साफ थी, सलोनी को मैं पसंद था और ज्यादा विरोध की उम्मीद नहीं थी, मेरे हाथों का दबाव उसकी कमर पर बढ़ गया.
पहली बार सलोनी ने अपने दिल के राज़ खोले. जैसे पहली नज़र में वो मुझे अच्छी लगी वैसा ही उसको ही फील हुआ. सलोनी अभी भी मुझसे चिपक कर बैठी थी. मेरा हाथ अभी भी उसकी कमर में था, न सलोनी ने कोई ऐतराज़ किया और न मैंने हाथ हटाया. बात साफ थी, सलोनी को मैं पसंद था और ज्यादा विरोध की उम्मीद नहीं थी, मेरे हाथों का दबाव उसकी कमर पर बढ़ गया.
मैं धीरे-धीरे उसकी कमर को सहलाने लगा, सलोनी के जिस्म का कम्पन मुझे महसूस हो रहा था और हो भी क्यों न …
पहली बार वो किसी लड़के के सम्पर्क में आई थी.
पहली बार वो किसी लड़के के सम्पर्क में आई थी.
धीरे-धीरे मेरे हाथ उसकी पीठ पर आ गए. पीठ को सहलाते वक़्त उसकी ब्रा की पट्टी को अच्छे से फील किया. सलोनी भी जान गई कि मैं किस रास्ते पर बढ़ रहा हूँ, पर वो कुछ बोल नहीं रही थी. बल्कि मेरी आँखों और मेरे चेहरे की तरफ देख रही थी एकटक.
फिर अचानक मैंने उसको छोड़ दिया और उठ कर थोड़ा दूर बैठ गया. सलोनी को कुछ समझ में नहीं आया. वो मेरी तरफ देखने लगी. शायद मेरा दूर जाना उसको अच्छा नहीं लगा. मगर मैं नहीं चाहता था कि वो मुझे गलत समझे. वह यह सोचे कि मैंने उसका फायदा उठाया.
सलोनी- क्या हुआ आपको?
मैं- कुछ नहीं, मुझे माफ़ कीजियेगा. मैं फिर बहक गया था, क्या करुं, आप में इतनी कशिश है कि मैं खुद को रोक ही नहीं पाता.
सलोनी- हम्म …
सलोनी- क्या हुआ आपको?
मैं- कुछ नहीं, मुझे माफ़ कीजियेगा. मैं फिर बहक गया था, क्या करुं, आप में इतनी कशिश है कि मैं खुद को रोक ही नहीं पाता.
सलोनी- हम्म …
काफी देर हम दोनों के बीच चुप्पी सी रही. सलोनी के चेहरे को देख कर लग रहा था कि वो कुछ सोच रही है, कुछ कश्मकश में है, क्या करे और क्या न करे … फिर एक गहरी साँस ली और उठ कर बाथरूम चली गई, फिर वहां से आकर सलोनी ने ही बात शुरू की. वो मेरे बारे में पूछने लगी और इन सब बातों से हम दोनों के बीच एक अलग रिश्ता सा बन गया.
थोड़ी देर पहले जो झिझक थी वो भी ख़त्म सी हो गई, एक अच्छे दोस्त की तरह हम बात करने लगे. 5-6 घंटे कब बीत गए पता ही नहीं चला. इसी बीच कानपुर आ गया. मेरा खाना लेकर मेरा जूनियर भी आ गया. मैंने खाना लेकर उसको पैसे देकर उसको विदा किया.
फिर ट्रेन के चलने के बाद हम दोनों ने साथ में खाना खाया. कहीं से लग नहीं रहा था कि कुछ घंटे पहले हम दोनों एक दूसरे के लिए अजनबी थे.
मैं खाना खाकर विंडो सीट पर बैठा था कि तभी सलोनी फ्रेश होकर अंदर आई. फिर एक चादर उठा कर मेरे पैरों पर सर रख कर लेट गई. पर मैं कुछ नहीं बोला. उसने मेरा एक हाथ अपने हाथ में लिया और दूसरे को अपने सर पर रख दिया. ये बोल्ड मूव था सलोनी का, बात साफ थी. थोड़ी देर पहले जिस कश्मकश में सलोनी थी, अब वो उससे वो बाहर आ चुकी थी और किसी निर्णय पर पहुंच चुकी थी.
यह बात भी साफ थी कि सलोनी इन पलों को जी लेना चाहती थी. मेरी झिझक को वो दूर करना चाहती थी. मेरे हाथों को वो सहलाने लगी. उसकी आंखें बंद थीं पर चेहरे पर मासूमियत भरी मुस्कान थी.
यह बात भी साफ थी कि सलोनी इन पलों को जी लेना चाहती थी. मेरी झिझक को वो दूर करना चाहती थी. मेरे हाथों को वो सहलाने लगी. उसकी आंखें बंद थीं पर चेहरे पर मासूमियत भरी मुस्कान थी.
वो एक अक्षत यौवना थी. उसके काले रंग के बावजूद उस चेहरे में निश्छलता और मासूमियत थी, उसके काले रंग पर लाल-लाल होंठ उफ्फ्फ … क्या कहूं आपको, मैं अभी भी झिझक रहा था और सलोनी भी इस बात को समझ रही थी.
काफी देर तक हम दोनों उसी अवस्था में ट्रेन के शोर को सुनते रहे. न वो कुछ बोली न मैं. बस बीच-बीच में आंख खोल कर मेरी तरफ जी भर के देख लेती थी. पता नहीं क्यों मेरे जैसा इंसान आज झिझक रहा था, वो जिसके जीवन में कई लड़कियां आ चुकी थीं.
काफी देर तक हम दोनों उसी अवस्था में ट्रेन के शोर को सुनते रहे. न वो कुछ बोली न मैं. बस बीच-बीच में आंख खोल कर मेरी तरफ जी भर के देख लेती थी. पता नहीं क्यों मेरे जैसा इंसान आज झिझक रहा था, वो जिसके जीवन में कई लड़कियां आ चुकी थीं.
ये बात सलोनी समझ गई तो उसने अपने हाथ से मेरा सर पकड़ के झुकाया और मेरे होंठों को अपने होंठों से जोड़ दिया. अब मेरी बारी थी पीछे न हटने की. उसके पवित्र रस से भरे होंठों को अपनी गिरफ्त में ले लिया मैंने और जी भर के रस पीने लगा. कभी निचला होंठ तो कभी ऊपर वाला तो कभी दोनों होंठ … उफ्फ्फ्फ़ कितना सॉफ्ट … कितना निश्छल … मेरा दिल ही नहीं कर रहा था कि उन पर से हट जाऊं … साँसों की गर्मी से हम दोनों ही बेहाल थे. मगर दोनों एक दूसरे के होंठों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे. सलोनी और मेरी आंखें बंद थीं. सिर्फ एक दूसरे की सांसों की आवाज़ सुन रहे थे. गर्म सांसों को महसूस कर रहे थे. सलोनी की जीभ को जी भर कर चूस रहा था. एक दूसरे के स्लाइवा को पी रहे थे हम दोनों. होंठ तो ऐसे जुड़े थे कि कभी जुदा ही न होंगे.
काफी देर के बाद जब हम अलग हुए तो सांसें पूरी तरह उफान में थीं, उसका सीना तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था. मैं धीरे से उठा और सबसे पहले केबिन की सारी विंडोज बंद कर दीं. सलोनी अभी भी वैसे ही आंखें बंद करके लेटी थी, मैं उसके बगल में लेट गया और वो भी मेरी बाँहों में सिमट आई. मेरी फैली बाँहों पर सिर रख दिया और मेरे पेट पर हाथ रख कर लिपट सी गई. मैंने भी उसे अपने जिस्म से लिपटा लिया.
उफ्फ्फ … कितना सॉफ्ट और मुलायम सा बदन था सलोनी का. कपड़ों के बावजूद उसके बदन की कोमलता को मैं महसूस कर सकता था. इस समय हम दोनों में सिर्फ एक बिना रिश्तों का प्यार था और सलोनी भी इन पलों को भरपूर जी लेना चाहती थी.
मैं बाँहों में भरे-भरे उसको गौर से देख रहा था. काला रंग, लम्बाई करीब 5’5″, कामुक सा जिस्म, शायद 32-24-32 होगा. उसने जीन्स और शॉर्ट कुर्ता पहन रखा था. ब्रा की लकीर कुर्ते से साफ नज़र आ रही थी.
मैं बाँहों में भरे-भरे उसको गौर से देख रहा था. काला रंग, लम्बाई करीब 5’5″, कामुक सा जिस्म, शायद 32-24-32 होगा. उसने जीन्स और शॉर्ट कुर्ता पहन रखा था. ब्रा की लकीर कुर्ते से साफ नज़र आ रही थी.
मैंने उसको अपने बदन से कस कर लिपटा लिया. उसकी सांसें भारी होने लगी थी, उसकी कमर को अच्छे से मैंने दबाया. धीरे से हाथ उसके चूतड़ों में ले जाकर उनको सहलाने लगा. बीच-बीच में पूरे चूतड़ हथेली में लेकर दबाने लगा.
सलोनी की भारी सांसों के बीच में उसको होंठों को चूमने लगा. मैं सलोनी के ऊपर आ गया. सलोनी मेरे भार के नीचे दबी हुई मेरी हर हरकत का आनंद लेने लगी, उसकी धीमी आवाज़ … आअह आह्ह उफ्फ्फ्फ़ …
सलोनी की भारी सांसों के बीच में उसको होंठों को चूमने लगा. मैं सलोनी के ऊपर आ गया. सलोनी मेरे भार के नीचे दबी हुई मेरी हर हरकत का आनंद लेने लगी, उसकी धीमी आवाज़ … आअह आह्ह उफ्फ्फ्फ़ …
मैंने अपना हाथ नीचे किया और उसका कुर्ता पकड़ कर ऊपर कर दिया. इतना ऊपर कि उसकी ब्रा उसके सामने उजागर हो गयी. उस ब्रा में क़ैद उन कबूतरों को देखकर मेरे मुँह से एक लार टपक कर उसके पेट पर आ गिरी. सलोनी का बदन बुरी तरह से जल रहा था इसलिए उस लार को भाप बनकर उड़ने में पल भी नहीं लगा.
उफ्फ्फ्फ़ … कितना सॉफ्ट जैसे रुई … मैंने उसकी कमर को सहलाना जारी रखा, सलोनी मेरे दो तरफ़ा आक्रमण को सह नहीं पाई और मुझे कस के बाँहों में जकड़ लिया, पागलों सी मेरे होंठों को चूमने लगी, मेरे शर्ट के बटन खोल कर मेरी बालों से भरी छाती पर हाथ फेरने लगी. लण्ड मेरा बहुत बेचैन हो गया था, मैंने शर्ट को उतार फेंका और उसका कुर्ता भी उतार दिया. आह्ह … मैरून कलर की लेस वाली ब्रा … मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूची को मुँह में भर लिया.
सलोनी- ओह्ह्ह … आअह्ह्ह्ह … उफ्फ्फ
सलोनी के हाथ स्वतः मेरे सिर पर चले गए और मेरे सिर को चूची पर दबाने लगी.
सलोनी- ओह्ह्ह … आअह्ह्ह्ह … उफ्फ्फ
सलोनी के हाथ स्वतः मेरे सिर पर चले गए और मेरे सिर को चूची पर दबाने लगी.
मेरे दूसरे हाथ ने जींस के बटन को खोल दिया और अपना हाथ धीरे से सरका दिया. जैसे ही उसकी चूत को टच किया. सलोनी ने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया. पर तब तक देर हो चुकी थी, अब मैं चाह कर भी रुक नहीं सकता था. हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा, नारी सुलभ लज़्ज़ा उसके चेहरे पर नज़र आई, मैंने उसके हाथ को धीरे से हटाया और चूत की लकीर पर पूरी उंगली फिराई.
सलोनी- रा … हु … ल … आह्ह्हह … नो, मत करो … प्लीज.
चूत पूरी तरह से गीली थी उसकी.
सलोनी- रा … हु … ल … आह्ह्हह … नो, मत करो … प्लीज.
चूत पूरी तरह से गीली थी उसकी.
मैंने पैंटी से उंगली निकाली तो सलोनी की आंख अपने आप खुल गयी और उसने मेरी तरफ देखा. मैंने भी उंगली को अपने मुँह में डाल कर चटकारा लेते हुए चूस लिया. सलोनी ने शर्मा कर मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्कराई. जैसे पूछ रही हो “ये क्या कर रहे हो?”
मैं भी चटकारते हुए बोला- यम्मी!
मैं भी चटकारते हुए बोला- यम्मी!
बस फिर क्या था, सलोनी ने मेरी तरफ देखते हुए अपने मुलायम हाथों की मुट्ठी से मेरे नंगे सीने में मुक्के मारना शुरू कर दिया. मैंने उसके कोमल हाथों को पकड़ कर हटाया और उस पर लेट गया, उसके रस से भरे होंठों को चूसने लगा, सलोनी ने भी तुरंत रेस्पॉन्स किया और वो भी मेरे नीचे को होंठों को चूसने लगी. आग लग चुकी थी. हवन की तैयारी थी.
दोनों ही एक दूसरे के होंठों को छोड़ने को नहीं तैयार थे. हम दोनों ही कामरस में डूबे थे. कामदेव हम दोनों पर मेहरबान थे. बस … मैंने धीरे से हाथ नीचे की तरफ सरका दिया … पैंटी में हाथ डाल कर उसकी चूत को सहलाने लगा.
“उफ्फ्फ़ … आह्ह्ह्ह … अह्ह्ह्ह … आअह्ह्ह … ओह्ह्ह्ह … उफ्फ्फ … नो-नो-नो … प्लीज … डोंट टच (छूओ मत) … अह्ह्ह्ह आआह्ह …” सलोनी की सिसकारी निकल गई.
“उफ्फ्फ़ … आह्ह्ह्ह … अह्ह्ह्ह … आअह्ह्ह … ओह्ह्ह्ह … उफ्फ्फ … नो-नो-नो … प्लीज … डोंट टच (छूओ मत) … अह्ह्ह्ह आआह्ह …” सलोनी की सिसकारी निकल गई.
मैं भी और ज्यादा उग्र सा हो गया. उसकी जींस धीरे से नीचे कर दी. इस काम में अब सलोनी ने भी अपनी अपने गुदाज़ चूतड़ उठा कर सहयोग किया. सलोनी सिर्फ मैरून कलर की ब्रा और पैंटी में थी जबकि मैं नीचे अभी भी कपड़ा पहने था. लण्ड मेरा अकड़ सा गया था, दर्द सा भी हो रहा था पर मैं चाहता था कि सलोनी खुद पहल करके मेरा लण्ड पकड़े, मेरे कपड़े खुद उतारे … इसलिए थोड़ा उसकी कामुकता को और जगाना था कि वो खुद काम वासना में वशीभूत हो कर खुद ही पहल कर दे.
मेरे हाथ अब तक उसका पूरा भूगोल नाप चुके थे. सलोनी भी मुझे रोक नहीं रही थी. सिर्फ सिमटी सी जा रही थी, ब्रा और पैंटी में उसका काला बदन सोने सा चमक रहा था. मेरा मुँह ने उसके पेट के पास जाकर उसकी गहरी नाभि को चूम लिया.
सलोनी- उफ्फ … आह्ह!
सलोनी- उफ्फ … आह्ह!
सिसकारियों की गूंज ट्रेन के शोर में दब सी गई पर मैं सुन सकता था. एक ऐसा शोर जो मेरे अंदर की काम ज्वाला को भड़का रहा था. मुझे झुलसा सी रही थी ये ज्वाला.
सलोनी ब्रा और पेंटी में खूबसूरत लग रही थी. उसकी खूबसूरती में उसका रंग कहीं भी आड़े आ नहीं रहा था. सच कहूं तो रंग किसी भी लड़की के खूबसूरती में आड़े नहीं आता है, ये बात सलोनी पर भी लागू हो रही थी.
सलोनी ब्रा और पेंटी में खूबसूरत लग रही थी. उसकी खूबसूरती में उसका रंग कहीं भी आड़े आ नहीं रहा था. सच कहूं तो रंग किसी भी लड़की के खूबसूरती में आड़े नहीं आता है, ये बात सलोनी पर भी लागू हो रही थी.
मखमल सा सिल्की बदन, कोका कोला की बोतल जैसा उसका जिस्म, पतली कमर, चौड़े कूल्हे, उसके सीने पर विकसित दो कमलपुष्प जैसे दो अमृत से भरे हुए अमृतकलश … उफ़्फ … दीवाना बना दिया उसने! झील सी गहरी आंखें, सुराहीदार गर्दन. मैं एक पल के लिए ये सोचने लग गया कि इतनी कामनीय काया की स्वामिनी सलोनी पर किसी ने डोरे क्यों नहीं डाले?
सलोनी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी. मैंने उसके पैरों को पकड़ा और उसकी पैरों की उँगलियों को एक एक करके चूसना शुरू किया. जैसे जैसे मैं चूमता जा रहा था वैसे वैसे उसके जिस्म की थरथराहट बढ़ती जा रही थी. उसके मुँह से निकलती सिसकारी बता रही थी उसको कितना आनंद आ रहा है- प्लीज़ … हट जाओ, छोड़ दो प्लीज़ … सीईई … मत करो, आह्ह … उफ्फ!
उंगली को चूमते चूमते मैं उसकी भरी हुई जांघों को सहला रहा था. कुछ ऊपर आ कर उसकी पिंडलियों को चाटना शुरू कर दिया.
उंगली को चूमते चूमते मैं उसकी भरी हुई जांघों को सहला रहा था. कुछ ऊपर आ कर उसकी पिंडलियों को चाटना शुरू कर दिया.
सलोनी- आअह्ह आह … आह … आह … उफ्फ्फ्फ़ … सी … आह्ह … मत करो ना!
मैं अभी भी अपनी जींस में था. लण्ड को आशा थी कि सलोनी उसको कैद से मुक्त कराएगी.
मैं एक एक करके उसकी पैरों की दसों उंगलियां चूसता चला गया और सलोनी बेचैन सी तड़प कर सिसकारी भरने लगी- उफ्फ … आअह्ह्ह अह्ह्ह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊह्ह … उफ्फ्फ … उफ्फ आह आह आह!
मैं अभी भी अपनी जींस में था. लण्ड को आशा थी कि सलोनी उसको कैद से मुक्त कराएगी.
मैं एक एक करके उसकी पैरों की दसों उंगलियां चूसता चला गया और सलोनी बेचैन सी तड़प कर सिसकारी भरने लगी- उफ्फ … आअह्ह्ह अह्ह्ह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊह्ह … उफ्फ्फ … उफ्फ आह आह आह!
सलोनी की कामनीय कंचन काया सिर्फ ब्रा और पेंटी में मेरे सामने थी और मैं अभी भी जींस में था. थरथराता जिस्म … जिसके एक-एक अंग को मैं धीरता के साथ चूमता जा रहा था.
मेरे लंड का बुरा हाल हो चुका था और वह अब बाहर आने के लिए मुझसे मिन्नतें करता हुआ दर्द करने लगा था.
मगर मैंने अपने लंड पर तरस नहीं खाया और सलोनी के जिस्म को चूमकर उसके पवित्र जिस्म की खुशबू में डूबता चला गया
मेरे लंड का बुरा हाल हो चुका था और वह अब बाहर आने के लिए मुझसे मिन्नतें करता हुआ दर्द करने लगा था.
मगर मैंने अपने लंड पर तरस नहीं खाया और सलोनी के जिस्म को चूमकर उसके पवित्र जिस्म की खुशबू में डूबता चला गया

No comments:
Post a Comment